vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
»
सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना
»
श्लोक 19
श्लोक
4.18.19
अस्य त्वं धरमाणस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
रुमायां वर्तसे कामात् स्नुषायां पापकर्मकृत्॥ १९॥
अनुवाद
तू जीवित रहते हुए भी महाबुद्धिमान सुग्रीव की पत्नी, जो तेरी पुत्रवधू के समान है, का काम-भोग कर रहा है, अतः तू पापी है॥19॥
While alive, you are lustfully exploiting the wife of this great-minded Sugreeva, who is like your daughter-in-law. Hence, you are a sinner.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×