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ramayan 4.18.19: तू जीवित रहते हुए भी महाबुद्धिमान सुग्रीव की पत्नी, जो तेरी पुत्रवधू के समान है, का काम-भोग कर रहा है, अतः तू पापी है॥19॥   |   ramayan सर्ग 4.18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  4.18.19 
अस्य त्वं धरमाणस्य सुग्रीवस्य महात्मन:।
रुमायां वर्तसे कामात् स्नुषायां पापकर्मकृत्॥ १९॥
 
 
अनुवाद
तू जीवित रहते हुए भी महाबुद्धिमान सुग्रीव की पत्नी, जो तेरी पुत्रवधू के समान है, का काम-भोग कर रहा है, अतः तू पापी है॥19॥
 
While alive, you are lustfully exploiting the wife of this great-minded Sugreeva, who is like your daughter-in-law. Hence, you are a sinner.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)