श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  4.18.13 
ज्येष्ठो भ्राता पिता वापि यश्च विद्यां प्रयच्छति।
त्रयस्ते पितरो ज्ञेया धर्मे च पथि वर्तिन:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
धर्म के मार्ग पर चलनेवाले मनुष्यों के लिए बड़ा भाई, पिता और शिक्षा देनेवाला गुरु- ये तीनों पिता के समान ही पूजनीय माने जाने चाहिए।॥13॥
 
The elder brother, the father and the one who imparts education, the Guru - these three should be considered as equally respectable as a father for those who stay on the path of Dharma.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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