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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 18: श्रीराम का वाली की बात का उत्तर देते हुए उसे दिये गये दण्ड का औचित्य बताना,वाली का अपने अपराध के लिये क्षमा माँगते हुए अङ्गद की रक्षा के लिये प्रार्थना करना
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श्लोक 10
श्लोक
4.18.10
तस्मिन् नृपतिशार्दूले भरते धर्मवत्सले।
पालयत्यखिलां पृथ्वीं कश्चरेद् धर्मविप्रियम्॥ १०॥
अनुवाद
राजाओं में श्रेष्ठ भरत धर्मपरायण हैं। वे सम्पूर्ण पृथ्वी पर शासन कर रहे हैं। उनके रहते हुए इस पृथ्वी पर कौन धर्म के विरुद्ध आचरण कर सकता है?॥10॥
‘Bharat, the best of kings, is devoted to Dharma. He is ruling the entire earth. As long as he is there, who on this earth can act against Dharma?॥10॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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