Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.17.54: ऐसा कहकर महाहृदयी वानरराज सूर्य के समान तेजस्वी श्री रामचन्द्रजी की ओर देखकर चुप हो गया। उसका मुख सूख गया था और बाण के आघात से उसे बड़ी पीड़ा हो रही थी॥54॥ | ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ऐसा कहकर महाहृदयी वानरराज सूर्य के समान तेजस्वी श्री रामचन्द्रजी की ओर देखकर चुप हो गया। उसका मुख सूख गया था और बाण के आघात से उसे बड़ी पीड़ा हो रही थी॥54॥
Having said this, the great-hearted monkey prince became silent looking at Shri Ramchandraji who was as radiant as the Sun. His mouth had become dry and he was in great pain due to the stroke of the arrow. ॥ 54॥
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे सप्तदश: सर्ग:॥ १७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें सत्रहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १७॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥