Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.17.53: यह संसार किसी न किसी समय काल के अधीन है। यही इसका स्वभाव है। अतः यदि मेरी मृत्यु भी हो जाए, तो मुझे इसका कोई दुःख नहीं है। किन्तु यदि आपने मेरी मृत्यु का कोई उपयुक्त उपाय खोज लिया हो, तो उस पर अच्छी तरह विचार करके मुझे बताइए।॥ 53॥ | ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यह संसार किसी न किसी समय काल के अधीन है। यही इसका स्वभाव है। अतः यदि मेरी मृत्यु भी हो जाए, तो मुझे इसका कोई दुःख नहीं है। किन्तु यदि आपने मेरी मृत्यु का कोई उपयुक्त उपाय खोज लिया हो, तो उस पर अच्छी तरह विचार करके मुझे बताइए।॥ 53॥
‘This world is subject to time at some point or the other. This is its very nature. Therefore, even if I die, I am not sorry for it. But if you have found a suitable answer for my death, then think about it well and then tell me.'॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥