श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 51
 
 
श्लोक  4.17.51 
न्यस्तां सागरतोये वा पाताले वापि मैथिलीम्।
आनयेयं तवादेशाच्छ्वेतामश्वतरीमिव॥ ५१॥
 
 
अनुवाद
जैसे भगवान हयग्रीव ने मधुकैटभ द्वारा अपहृत श्वेताश्वतरी श्रुतिका को बचाया था, वैसे ही आपकी आज्ञा से मैं मिथिला की पुत्री सीता को वापस ले आता, चाहे वह समुद्र के जल में या पाताल में ही क्यों न रखी जाती॥ 51॥
 
Just as Lord Hayagriva rescued Shwetashvatari Shrutika who was abducted by Madhukaitabha, similarly, on your orders, I would have brought back Sita, daughter of Mithila, even if she had been kept in the waters of the ocean or in the netherworld.॥ 51॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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