श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  4.17.5 
शक्रदत्ता वरा माला काञ्चनी रत्नभूषिता।
दधार हरिमुख्यस्य प्राणांस्तेज: श्रियं च सा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
इन्द्र द्वारा दी गई रत्नजड़ित उत्तम स्वर्णमाला उस वानरराज के जीवन, तेज और सौन्दर्य को धारण किये हुए थी।
 
The excellent gold garland studded with gems given by Indra was carrying the life, glory and beauty of that monkey king.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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