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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड
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सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना
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श्लोक 45
श्लोक
4.17.45
अशुभं चाप्ययुक्तं च सतां चैव विगर्हितम्।
वक्ष्यसे चेदृशं कृत्वा सद्भि: सह समागत:॥ ४५॥
अनुवाद
पुण्यात्माओं द्वारा ऐसा अशुभ, अनुचित और निन्दित कर्म करके जब तुम सज्जन पुरुषों से मिलोगे तो उनसे क्या कहोगे? ॥ 45॥
Having committed such an inauspicious, improper and condemned deed by the virtuous, what will you say to the noble men when you meet them? ॥ 45॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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