श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  4.17.44 
छिन्नचारित्र्यकक्ष्येण सतां धर्मातिवर्तिना।
त्यक्तधर्माङ्कुशेनाहं निहतो रामहस्तिना॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हाय! आज मैं उस रामरूपी हाथी के द्वारा मारा गया हूँ, जिसने नीतिरूपी रस्सी तोड़ दी है, जिसने सज्जनों के धर्म और मर्यादा का उल्लंघन किया है और जिसने धर्म की लगाम की भी अवहेलना की है॥ 44॥
 
Alas! I have been killed today by that elephant in the form of Rama who has broken the rope of morality, who has violated the dharma and decorum of the virtuous and who has also disregarded the reins of dharma.॥ 44॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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