| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना » श्लोक 43 |
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| | | | श्लोक 4.17.43  | शठो नैकृतिक: क्षुद्रो मिथ्याप्रश्रितमानस:।
कथं दशरथेन त्वं जात: पापो महात्मना॥ ४३॥ | | | | | | अनुवाद | | ‘तुम दुष्ट (गुप्त रूप से दूसरों को अप्रसन्न करने वाले), अहित करने वाले, नीच और मिथ्याभाषी होकर भी शान्त रहने वाले हो। महान राजा दशरथ ने तुम जैसे पापी को कैसे जन्म दिया?॥ 43॥ | | | | ‘You are the one who remains calm even though you are a wicked person (one who secretly displeases others), a harm-doer, a mean person and a liar. How did the great king Dasharath give birth to a sinner like you?॥ 43॥ | | ✨ ai-generated | | |
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