Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.17.42: ककुत्स्थ! जिस प्रकार पतिव्रता युवती अपने पापी पति से सुरक्षित नहीं रह सकती, उसी प्रकार तुम्हारे समान पति पाकर भी यह पृथ्वी सुरक्षित नहीं रह सकती॥ 42॥ | ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
त्वया नाथेन काकुत्स्थ न सनाथा वसुंधरा।
प्रमदा शीलसम्पूर्णा पत्येव च विधर्मणा॥ ४२॥
अनुवाद
ककुत्स्थ! जिस प्रकार पतिव्रता युवती अपने पापी पति से सुरक्षित नहीं रह सकती, उसी प्रकार तुम्हारे समान पति पाकर भी यह पृथ्वी सुरक्षित नहीं रह सकती॥ 42॥
Kakutstha! Just as a virtuous young woman cannot be safe from her sinful husband, in the same way this earth cannot be protected even after having a husband like you.॥ 42॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥