श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  4.17.38 
अधार्यं चर्म मे सद्भी रोमाण्यस्थि च वर्जितम्।
अभक्ष्याणि च मांसानि त्वद्विधैर्धर्मचारिभि:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हम वानरों की खाल भी पुण्यात्मा पुरुषों के पहनने योग्य नहीं है। हमारे केश और हड्डियाँ भी वर्जित हैं (छूने योग्य नहीं हैं। मांस तो तुम्हारे जैसे धर्मात्मा पुरुषों के लिए सदैव अभक्ष्य है; फिर तुमने किस लोभ से मुझ वानर को अपने बाणों का शिकार बनाया है?)॥38॥
 
‘Even the skin of us monkeys is not suitable for virtuous men to wear. Our hair and bones are also forbidden (not fit to be touched. Meat is always inedible for righteous men like you; then with what greed have you made me a monkey the victim of your arrows?)॥ 38॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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