श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  4.17.37 
सूचकश्च कदर्यश्च मित्रघ्नो गुरुतल्पग:।
लोकं पापात्मनामेते गच्छन्ते नात्र संशय:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
चुगली करनेवाला, लोभी, मित्र-हत्यारा और व्यभिचारी - ये पापियों के लोक में जाते हैं - इसमें कोई संदेह नहीं है ॥37॥
 
The backbiter, the greedy, the friend-killer and the adulterer - they go to the world of sinners - there is no doubt about it. 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)