Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.17.34: हे मनुष्यों! तुम धर्म में श्रद्धा नहीं रखते, न ही तुम्हारी बुद्धि धन के पीछे लगी रहती है। हे मनुष्यों के स्वामी! तुम स्वेच्छाचारी हो। इसीलिए तुम्हारी इन्द्रियाँ तुम्हें जहाँ-तहाँ घसीटती रहती हैं॥ 34॥ | ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न तेऽस्त्यपचितिर्धर्मे नार्थे बुद्धिरवस्थिता।
इन्द्रियै: कामवृत्त: सन् कृष्यसे मनुजेश्वर॥ ३४॥
अनुवाद
हे मनुष्यों! तुम धर्म में श्रद्धा नहीं रखते, न ही तुम्हारी बुद्धि धन के पीछे लगी रहती है। हे मनुष्यों के स्वामी! तुम स्वेच्छाचारी हो। इसीलिए तुम्हारी इन्द्रियाँ तुम्हें जहाँ-तहाँ घसीटती रहती हैं॥ 34॥
‘You have no respect for religion, nor is your intellect stable in the pursuit of wealth. O Lord of men! You are willful. That is why your senses drag you anywhere.॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥