| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड » सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना » श्लोक 31 |
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| | | | श्लोक 4.17.31  | भूमिर्हिरण्यं रूपं च विग्रहे कारणानि च।
तत्र कस्ते वने लोभो मदीयेषु फलेषु वा॥ ३१॥ | | | | | | अनुवाद | | पृथ्वी, सोना और चाँदी - राजा लोग इन्हीं वस्तुओं के लिए लड़ते हैं। ये तीनों ही झगड़े के मूल कारण हैं। किन्तु वे भी यहाँ नहीं हैं। इस दिशा में, इस वन में या हमारे फलों में तुम्हें क्या लोभ हो सकता है?॥31॥ | | | | ‘Earth, gold and silver—kings fight for these things. These three are the root causes of conflict. But even they are not here. What greed can you have in this direction, in this forest or in our fruits?॥ 31॥ | | ✨ ai-generated | | |
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