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ramayan 4.17.28: महाराज! आप रघु के कुल में उत्पन्न हुए हैं। आप पुण्यात्मा के रूप में प्रसिद्ध होते हुए भी इतने क्रूर निकले! यदि आपका यही वास्तविक स्वरूप है, तो आप विनम्र और दयालु महात्मा का वेश धारण करके क्यों सर्वत्र विचरण करते हैं?॥ 28॥   |   ramayan सर्ग 4.17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.17.28 
त्वं राघवकुले जातो धर्मवानिति विश्रुत:।
अभव्यो भव्यरूपेण किमर्थं परिधावसे॥ २८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप रघु के कुल में उत्पन्न हुए हैं। आप पुण्यात्मा के रूप में प्रसिद्ध होते हुए भी इतने क्रूर निकले! यदि आपका यही वास्तविक स्वरूप है, तो आप विनम्र और दयालु महात्मा का वेश धारण करके क्यों सर्वत्र विचरण करते हैं?॥ 28॥
 
‘Maharaj! You were born in the clan of Raghu. Though you are famous as a virtuous person, you turned out to be so cruel! If this is your real form, then why do you run around everywhere assuming the appearance of a humble and kind saint?॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)