श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  4.17.27 
क: क्षत्रियकुले जात: श्रुतवान् नष्टसंशय:।
धर्मलिङ्गप्रतिच्छन्न: क्रूरं कर्म समाचरेत्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
क्षत्रिय कुल में उत्पन्न, शास्त्रों का ज्ञाता, संशयरहित और धार्मिक वेशधारी मनुष्य ऐसा क्रूर कर्म कौन कर सकता है?॥ 27॥
 
Who, born in a Kshatriya family, having knowledge of the scriptures, being free from doubts and dressed in religious attire, can commit such a cruel act?॥ 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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