श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  4.17.20 
तान् गुणान् सम्प्रधार्याहमग्रॺं चाभिजनं तव।
तारया प्रतिषिद्ध: सन् सुग्रीवेण समागत:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
आपके इन सभी गुणों पर विश्वास रखते हुए तथा आपके उत्तम वंश का स्मरण करते हुए, तारा के मना करने पर भी मैं सुग्रीव के साथ युद्ध करने आया हूँ।
 
Having faith in all these good qualities in you and remembering your noble lineage, I came to fight along with Sugreeva in spite of Tara's refusal.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)