श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 17: वाली का श्रीरामचन्द्रजी को फटकारना  »  श्लोक 17-18
 
 
श्लोक  4.17.17-18 
कुलीन: सत्त्वसम्पन्नस्तेजस्वी चरितव्रत:।
राम: करुणवेदी च प्रजानां च हिते रत:॥ १७॥
सानुक्रोशो महोत्साह: समयज्ञो दृढव्रत:।
इत्येतत् सर्वभूतानि कथयन्ति यशो भुवि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
आपकी कीर्ति का वर्णन करते हुए इस पृथ्वी पर सभी प्राणी कहते हैं - श्री रामचन्द्रजी कुलीन, उत्तम गुणों से युक्त, तेजस्वी, उत्तम व्रतों का पालन करने वाले, दयावान, प्रजा के हितैषी, दयालु, अति उत्साही, समय पर कार्य करने वाले और सदाचार के ज्ञाता तथा दृढ़ निश्चयी हैं ॥17-18॥
 
Describing your fame, all the living beings on this earth say - Shri Ramchandraji is noble, full of good qualities, brilliant, observes good fasts, experiences compassion, is well-wisher of the people, kind, very enthusiastic, knowledgeable of timely work and good conduct and has a firm resolve. 17-18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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