श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.16.8 
अहं ह्याजिस्थितस्यास्य करिष्यामि यदीप्सितम्।
वृक्षैर्मुष्टिप्रहारैश्च पीडित: प्रतियास्यति॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मैं युद्धभूमि में खड़े सुग्रीव की सभी इच्छाएँ पूरी करूँगा। वह वृक्षों और मुक्कों की मार सहता हुआ स्वयं ही भाग जाएगा। 8.
 
I will fulfill all the wishes of Sugreeva standing on the battlefield. He will run away on his own, being hit by the trees and punches. 8.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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