Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.16.39: इन्द्रकुमार वालि के शरीर से जल के समान रक्त की धारा बहने लगी। वह उसमें नहाकर युद्धस्थल में भूमि पर ऐसे गिर पड़ा, जैसे वायु से पुष्पित अशोक वृक्ष उखड़ गया हो और इन्द्र का ध्वज आकाश से गिर पड़ा हो। 39। | ramayan सर्ग 4.16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
इन्द्रकुमार वालि के शरीर से जल के समान रक्त की धारा बहने लगी। वह उसमें नहाकर युद्धस्थल में भूमि पर ऐसे गिर पड़ा, जैसे वायु से पुष्पित अशोक वृक्ष उखड़ गया हो और इन्द्र का ध्वज आकाश से गिर पड़ा हो। 39।
A stream of blood started flowing from the body of Indrakumar Vali like water. He was bathed in it and fell unconscious on the ground in the battlefield like a flowering Ashoka tree uprooted by the wind and Indra's flag falling down from the sky. 39.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे षोडश: सर्ग:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें सोलहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १६॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥