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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  4.16.35 
मुक्तस्तु वज्रनिर्घोष: प्रदीप्ताशनिसंनिभ:।
राघवेण महाबाणो वालिवक्षसि पातित:॥ ३५॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी ने वह महान बाण छोड़ा, जो वज्र के समान गर्जना करता था और प्रज्वलित अग्नि के समान प्रकाश उत्पन्न करता था, और उससे बाली की छाती पर आघात हुआ।
 
Sri Raghunatha released that great arrow, which thundered like a thunderbolt and produced light like a blazing fire, and with it struck Vali on the chest.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)