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ramayan 4.16.33: उन्होंने अपने धनुष पर विषैले सर्प के समान भयंकर बाण चढ़ाया और उसे बड़े जोर से खींचा, मानो यमराज ने कालचक्र उठा लिया हो।   |   ramayan सर्ग 4.16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  4.16.33 
ततो धनुषि संधाय शरमाशीविषोपमम्।
पूरयामास तच्चापं कालचक्रमिवान्तक:॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
उन्होंने अपने धनुष पर विषैले सर्प के समान भयंकर बाण चढ़ाया और उसे बड़े जोर से खींचा, मानो यमराज ने कालचक्र उठा लिया हो।
 
He placed a fearsome arrow like a poisonous serpent on his bow and pulled it with great force, as if Yamaraja had lifted the wheel of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)