श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  4.16.31 
हीयमानमथापश्यत् सुग्रीवं वानरेश्वरम्।
प्रेक्षमाणं दिशश्चैव राघव: स मुहुर्मुहु:॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
श्री रघुनाथजी ने देखा कि वानरराज सुग्रीव दुर्बल हो रहे हैं और बार-बार इधर-उधर देख रहे हैं ॥31॥
 
Sri Raghunatha saw that the monkey king Sugreeva was becoming weak and was repeatedly looking here and there. ॥ 31॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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