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ramayan 4.16.3: हे कायर! जो वीर योद्धा कभी पराजित नहीं हुए और जिन्होंने युद्ध के अवसर पर कभी पीठ नहीं दिखाई, उनके लिए शत्रु की चुनौती का सामना करना मृत्यु से भी अधिक दुःखदायी है॥3॥   |   ramayan सर्ग 4.16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.16.3 
अधर्षितानां शूराणां समरेष्वनिवर्तिनाम्।
धर्षणामर्षणं भीरु मरणादतिरिच्यते॥ ३॥
 
 
अनुवाद
हे कायर! जो वीर योद्धा कभी पराजित नहीं हुए और जिन्होंने युद्ध के अवसर पर कभी पीठ नहीं दिखाई, उनके लिए शत्रु की चुनौती का सामना करना मृत्यु से भी अधिक दुःखदायी है॥3॥
 
Coward! For those brave warriors who have never been defeated and who have never turned their back on the occasion of war, facing the challenge of the enemy is more painful than death.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)