श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 27-28h
 
 
श्लोक  4.16.27-28h 
वालिना भग्नदर्पस्तु सुग्रीवो मन्दविक्रम:॥ २७॥
वालिनं प्रति सामर्षो दर्शयामास राघवम्।
 
 
अनुवाद
वालि ने सुग्रीव का अभिमान चूर कर दिया। उसका पराक्रम क्षीण होने लगा। तब वालि के प्रति क्रोध से भरे सुग्रीव ने श्री रामचंद्र को उसकी स्थिति बताई।
 
Vali shattered the pride of Sugreeva. His valour began to wane. Then Sugreeva, filled with resentment towards Vali, showed his condition to Shri Ramchandra. 27 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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