श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  4.16.21 
एवमुक्तस्तु सुग्रीव: क्रुद्धो वालिनमब्रवीत्।
तव चैष हरन् प्राणान् मुष्टि: पततु मूर्धनि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
जब वालि ने ऐसा कहा तो सुग्रीव ने क्रोधित होकर उससे कहा, 'मेरा यह मुक्का भी तेरे प्राण लेने के लिए तेरे सिर पर पड़े।'
 
When Vali said this, Sugreeva angrily said to her, 'May this fist of mine also fall on your head to take your life.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)