Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 4.16.18: सुग्रीव भी बड़े आवेश के साथ मुट्ठी बाँधे हुए स्वर्ण-माला से सुशोभित पुरुष की ओर बढ़ा।   |   ramayan सर्ग 4.16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 16: वाली का तारा को डाँटकर लौटाना और सुग्रीव से जूझना तथा श्रीराम के बाण से घायल होकर पृथ्वी पर गिरना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  4.16.18 
श्लिष्टं मुष्टिं समुद्यम्य संरब्धतरमागत:।
सुग्रीवोऽपि समुद्दिश्य वालिनं हेममालिनम्॥ १८॥
 
 
अनुवाद
सुग्रीव भी बड़े आवेश के साथ मुट्ठी बाँधे हुए स्वर्ण-माला से सुशोभित पुरुष की ओर बढ़ा।
 
Sugreeva too advanced towards the one adorned with the golden garland, with his fist clenched, with great passion.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)