Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.15.7: 'वीर! मेरी उत्तम सलाह सुनो और इस क्रोध को त्याग दो, जो अचानक आने वाली नदी के वेग के समान बढ़ गया है। जैसे कोई व्यक्ति प्रातःकाल उठकर रात्रि में पहनी हुई पुष्पमाला को त्याग देता है, वैसे ही इस क्रोध को भी त्याग दो।' | ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'वीर! मेरी उत्तम सलाह सुनो और इस क्रोध को त्याग दो, जो अचानक आने वाली नदी के वेग के समान बढ़ गया है। जैसे कोई व्यक्ति प्रातःकाल उठकर रात्रि में पहनी हुई पुष्पमाला को त्याग देता है, वैसे ही इस क्रोध को भी त्याग दो।'
‘Valiant! Listen to my good advice and give up this anger which has increased like the force of a river that suddenly comes. Just as a man who wakes up from his bed in the morning gives up the garland of flowers that he had used during the night; in the same way give up this anger.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥