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ramayan 4.15.30: स्वामी! प्रसन्न हो जाइए। मैं आपके हित के लिए कुछ कह रहा हूँ। कृपया इसे ध्यानपूर्वक सुनें। क्रोध के पीछे न भागें। कोसलराजकुमार श्री राम इंद्र के समान प्रतापी हैं। उनसे शत्रुता या युद्ध करना आपके लिए उचित नहीं है।'   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.15.30 
प्रसीद पथ्यं शृणु जल्पितं हि मे
न रोषमेवानुविधातुमर्हसि।
क्षमो हि ते कोशलराजसूनुना
न विग्रह: शक्रसमानतेजसा॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
स्वामी! प्रसन्न हो जाइए। मैं आपके हित के लिए कुछ कह रहा हूँ। कृपया इसे ध्यानपूर्वक सुनें। क्रोध के पीछे न भागें। कोसलराजकुमार श्री राम इंद्र के समान प्रतापी हैं। उनसे शत्रुता या युद्ध करना आपके लिए उचित नहीं है।'
 
Swami! Please be happy. I am telling you something for your benefit. Please listen to it carefully. Do not just follow the anger. Kosalrajkummar Shri Ram is as illustrious as Indra. It is not right for you to have enmity with him or to wage war against him.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)