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ramayan 4.15.3: तब उस स्वर्णिम पीतवर्ण वाले पुरुष का सारा शरीर क्रोध से दग्ध हो गया और वह राहु से पीड़ित सूर्य के समान दीन-हीन दिखाई देने लगा।   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.15.3 
ततो रोषपरीताङ्गो वाली स कनकप्रभ:।
उपरक्त इवादित्य: सद्यो निष्प्रभतां गत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
तब उस स्वर्णिम पीतवर्ण वाले पुरुष का सारा शरीर क्रोध से दग्ध हो गया और वह राहु से पीड़ित सूर्य के समान दीन-हीन दिखाई देने लगा।
 
Then the whole body of the one with a golden yellow complexion became inflamed with anger. He instantly started looking destitute like the Sun affected by Rahu. 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)