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ramayan 4.15.29: यदि आप मुझ पर प्रसन्नता चाहते हैं और मुझे अपना हितैषी मानते हैं, तो मैं आपसे प्रेमपूर्वक प्रार्थना करता हूँ कि आप मेरी उत्तम सलाह स्वीकार करें॥ 29॥   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  4.15.29 
यदि ते मत्प्रियं कार्यं यदि चावैषि मां हिताम्।
याच्यमान: प्रियत्वेन साधु वाक्यं कुरुष्व मे॥ २९॥
 
 
अनुवाद
यदि आप मुझ पर प्रसन्नता चाहते हैं और मुझे अपना हितैषी मानते हैं, तो मैं आपसे प्रेमपूर्वक प्रार्थना करता हूँ कि आप मेरी उत्तम सलाह स्वीकार करें॥ 29॥
 
If you wish to please me and consider me to be your well-wisher, then I request you with love that you accept my noble advice.॥ 29॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)