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ramayan 4.15.25-26: वानर सुग्रीव आपका छोटा भाई है। इसलिए वह आपके प्रेम और स्नेह का पात्र है। चाहे वह ऋषिमुख में रहे या किष्किंधा में, वह आपका मित्र है। मुझे इस पृथ्वी पर उसके समान कोई दूसरा मित्र नहीं दिखाई देता।   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 25-26
 
 
श्लोक  4.15.25-26 
लालनीयो हि ते भ्राता यवीयानेष वानर:॥ २५॥
तत्र वा सन्निहस्थो वा सर्वथा बन्धुरेव ते।
नहि तेन समं बन्धुं भुवि पश्यामि कंचन॥ २६॥
 
 
अनुवाद
वानर सुग्रीव आपका छोटा भाई है। इसलिए वह आपके प्रेम और स्नेह का पात्र है। चाहे वह ऋषिमुख में रहे या किष्किंधा में, वह आपका मित्र है। मुझे इस पृथ्वी पर उसके समान कोई दूसरा मित्र नहीं दिखाई देता।
 
The monkey Sugreeva is your younger brother. Therefore, he deserves your love and affection. Whether he lives in Rishimuk or Kishkinda, he is your friend. I do not see anyone else on this earth who is as close as him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)