श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 24-25h
 
 
श्लोक  4.15.24-25h 
अहं हि ते क्षमं मन्ये तेन रामेण सौहृदम्॥ २४॥
सुग्रीवेण च सम्प्रीतिं वैरमुत्सृज्य दूरत:।
 
 
अनुवाद
मैं समझता हूँ कि तुम्हारे लिए यही अच्छा है कि तुम अपना बैर-भाव त्यागकर राम के साथ सौहार्दपूर्ण और सुग्रीव के साथ प्रेम का सम्बन्ध स्थापित करो॥24 1/2॥
 
I think it is best for you to put aside your animosity and establish a relationship of cordiality with Rama and love with Sugreeva.॥ 24 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)