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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 22-23h
 
 
श्लोक  4.15.22-23h 
शूर वक्ष्यामि ते किंचिन्न चेच्छाम्यभ्यसूयितुम्॥ २२॥
श्रूयतां क्रियतां चैव तव वक्ष्यामि यद्धितम्।
 
 
अनुवाद
'वीर! मैं तुम्हारे गुणों में दोष नहीं देखना चाहता। इसलिए मैं तुमसे कुछ कह रहा हूँ। मैं तुम्हें वही बता रहा हूँ जो तुम्हारे लिए अच्छा है। तुम उसे सुनो और वैसा ही करो।'
 
‘Valiant! I do not want to see faults in your qualities. Hence I am telling you something. I am telling you what is good for you. You listen to it and do the same.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)