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ramayan 4.15.21-22h: जैसे हिमालय नाना प्रकार की धातुओं की खान है, वैसे ही श्री राम भी उत्तम गुणों के विशाल भण्डार हैं। अतः उन महात्मा राम का विरोध करना तुम्हारे लिए कदापि उचित नहीं है। क्योंकि युद्धकला में उनका कोई सानी नहीं है। उन्हें परास्त करना अत्यन्त कठिन है॥ 21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  4.15.21-22h 
धातूनामिव शैलेन्द्रो गुणानामाकरो महान्।
तत् क्षमो न विरोधस्ते सह तेन महात्मना॥ २१॥
दुर्जयेनाप्रमेयेण रामेण रणकर्मसु।
 
 
अनुवाद
जैसे हिमालय नाना प्रकार की धातुओं की खान है, वैसे ही श्री राम भी उत्तम गुणों के विशाल भण्डार हैं। अतः उन महात्मा राम का विरोध करना तुम्हारे लिए कदापि उचित नहीं है। क्योंकि युद्धकला में उनका कोई सानी नहीं है। उन्हें परास्त करना अत्यन्त कठिन है॥ 21 1/2॥
 
‘Just as the Himalayas are a mine of various metals, similarly Shri Ram is a huge storehouse of excellent qualities. Therefore, it is not at all appropriate for you to oppose that great soul Ram. Because he has no equal in the art of war. It is very difficult to defeat him.॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)