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ramayan 4.15.2: उसकी गर्जना सुनकर, जिससे समस्त प्राणी काँप उठे, उसका सारा अभिमान सहसा नष्ट हो गया और वह अत्यन्त क्रोधित हो गया॥2॥   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  4.15.2 
श्रुत्वा तु तस्य निनदं सर्वभूतप्रकम्पनम्।
मदश्चैकपदे नष्ट: क्रोधश्चापादितो महान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसकी गर्जना सुनकर, जिससे समस्त प्राणी काँप उठे, उसका सारा अभिमान सहसा नष्ट हो गया और वह अत्यन्त क्रोधित हो गया॥2॥
 
On hearing his roar which trembled upon all creatures, all his pride suddenly vanished and he became extremely angry.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)