Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.15.18-19: वे दोनों सुग्रीव को प्रसन्न करने के लिए उनके पास पहुँचे हैं। उन दोनों में से जिन्हें युद्ध में आपके भाई का सहायक बताया गया है, वे श्री राम हैं, जो शत्रु सेना का संहार करने वाले हैं और प्रलयकाल में प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हैं। वे कल्पवृक्ष हैं, पुण्यात्मा पुरुषों के आश्रय हैं और संकटग्रस्त लोगों के लिए सबसे बड़े सहारे हैं॥18-19॥ | ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुग्रीवप्रियकामार्थं प्राप्तौ तत्र दुरासदौ।
स ते भ्रातुर्हि विख्यात: सहायो रणकर्मणि॥ १८॥
राम: परबलामर्दी युगान्ताग्निरिवोत्थित:।
निवासवृक्ष: साधूनामापन्नानां परा गति:॥ १९॥
अनुवाद
वे दोनों सुग्रीव को प्रसन्न करने के लिए उनके पास पहुँचे हैं। उन दोनों में से जिन्हें युद्ध में आपके भाई का सहायक बताया गया है, वे श्री राम हैं, जो शत्रु सेना का संहार करने वाले हैं और प्रलयकाल में प्रज्वलित अग्नि के समान तेजस्वी हैं। वे कल्पवृक्ष हैं, पुण्यात्मा पुरुषों के आश्रय हैं और संकटग्रस्त लोगों के लिए सबसे बड़े सहारे हैं॥18-19॥
‘Both of them have reached Sugreeva to please him. Out of the two, the one who has been described as your brother's assistant in the war is Shri Ram, the destroyer of the enemy army and is as radiant as the fire blazing during the time of deluge. He is the Kalpavriksha, the shelter of the virtuous men and the biggest support for the people in trouble.॥ 18-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥