श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  4.15.14 
प्रकृत्या निपुणश्चैव बुद्धिमांश्चैव वानर:।
नापरीक्षितवीर्येण सुग्रीव: सख्यमेष्यति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘सुग्रीव वानर स्वभाव से ही कुशल और बुद्धिमान है। वह ऐसे किसी पुरुष से मित्रता नहीं करेगा जिसके बल और पराक्रम की उसने भली-भाँति परीक्षा न की हो।॥14॥
 
‘The monkey Sugreeva is by nature skilful and intelligent. He will not make friendship with any man whose strength and valour he has not thoroughly tested.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)