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ramayan 4.15.1: उस समय क्रोधित वालि अपने अन्तःपुर में था। वहीं से उसे अपने भाई महामनस्वी सुग्रीव की गर्जना सुनाई दी।   |   ramayan सर्ग 4.15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 15: सुग्रीव की गर्जना सुनकर वाली का युद्ध के लिये निकलना और तारा का उसे रोककर सुग्रीव और श्रीराम के साथ मैत्री कर लेने के लिये समझाना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  4.15.1 
अथ तस्य निनादं तं सुग्रीवस्य महात्मन:।
शुश्रावान्त:पुरगतो वाली भ्रातुरमर्षण:॥ १॥
 
 
अनुवाद
उस समय क्रोधित वालि अपने अन्तःपुर में था। वहीं से उसे अपने भाई महामनस्वी सुग्रीव की गर्जना सुनाई दी।
 
At that time, the infuriated Vali was in his inner chambers. It was from there that he heard the roar of his brother, the great-minded Sugreeva.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)