Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.14.22: तत्पश्चात्, सूर्यपुत्र सुग्रीव, जिनकी गर्जना मेघ की गर्जना के समान गम्भीर थी और जिनकी प्रभा वीरता से बढ़ी हुई थी, बड़े अधीर होकर बार-बार गर्जना करने लगे, मानो वायु के वेग से क्षुब्ध तरंगों से सुशोभित नदियों का स्वामी समुद्र शोर कर रहा हो। | ramayan सर्ग 4.14: वाली-वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तत्पश्चात्, सूर्यपुत्र सुग्रीव, जिनकी गर्जना मेघ की गर्जना के समान गम्भीर थी और जिनकी प्रभा वीरता से बढ़ी हुई थी, बड़े अधीर होकर बार-बार गर्जना करने लगे, मानो वायु के वेग से क्षुब्ध तरंगों से सुशोभित नदियों का स्वामी समुद्र शोर कर रहा हो।
Thereafter Sugreeva, the renowned son of the Sun, whose roar was as deep as the roar of a cloud and whose brilliance was enhanced by valour, began to roar again and again with great impatience, as if the ocean, the lord of rivers adorned with waves agitated by the force of the wind, was making a noise.
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे चतुर्दश: सर्ग: ॥ १ ४॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें चौदहवाँ सर्ग पूरा हुआ ॥ १ ४॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥