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ramayan 4.14.16-17h: जैसे इन्द्र वर्षा करके धान के खेतों को फलों से धन्य करते हैं, वैसे ही मैं अपने बाणों द्वारा बालि को मारकर तुम्हारा मनोरथ पूर्ण करूँगा। अतः हे सुग्रीव! स्वर्ण-मालाधारी बालि को बुलाने के लिए तुम इतने जोर से दहाड़ना कि वह वानरों की नगरी से निकलकर तुम्हारा सामना करने आए॥16 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.14: वाली-वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 14: वाली-वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना  »  श्लोक 16-17h
 
 
श्लोक  4.14.16-17h 
प्रसूतं कलमक्षेत्रं वर्षेणेव शतक्रतु:।
तदाह्वाननिमित्तं च वालिनो हेममालिन:॥ १६॥
सुग्रीव कुरु तं शब्दं निष्पतेद् येन वानर:।
 
 
अनुवाद
जैसे इन्द्र वर्षा करके धान के खेतों को फलों से धन्य करते हैं, वैसे ही मैं अपने बाणों द्वारा बालि को मारकर तुम्हारा मनोरथ पूर्ण करूँगा। अतः हे सुग्रीव! स्वर्ण-मालाधारी बालि को बुलाने के लिए तुम इतने जोर से दहाड़ना कि वह वानरों की नगरी से निकलकर तुम्हारा सामना करने आए॥16 1/2॥
 
‘Just as Indra blesses the rice fields with fruits by raining, similarly I will fulfil your desire by killing Vali using my arrows. Therefore, Sugriv! To call Vali, who wears a golden garland, you should roar so loudly that she comes out of the monkey city to face you.॥ 16 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)