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ramayan 4.14.12-13h: "यदि वह मेरे दर्शन पाकर भी जीवित लौट आए, तो तुम मुझे दोषी समझकर तुरन्त ही जी भरकर मेरी निन्दा करो। ॥12 1/2॥   |   ramayan सर्ग 4.14: वाली-वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 14: वाली-वध के लिये श्रीराम का आश्वासन पाकर सुग्रीव की विकट गर्जना  »  श्लोक 12-13h
 
 
श्लोक  4.14.12-13h 
यदि दृष्टिपथं प्राप्तो जीवन् स विनिवर्तते॥ १२॥
ततो दोषेण मागच्छेत् सद्यो गर्हेच्च मां भवान्।
 
 
अनुवाद
"यदि वह मेरे दर्शन पाकर भी जीवित लौट आए, तो तुम मुझे दोषी समझकर तुरन्त ही जी भरकर मेरी निन्दा करो। ॥12 1/2॥
 
"If he comes back alive even after coming in my sight, then you should consider me guilty and immediately criticize me to your heart's content. ॥ 12 1/2 ॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)