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ramayan 4.13.8: उन सरोवरों में सारस, हंस, बगुले, जलपक्षी, चक्रवाक आदि पक्षी कलरव कर रहे थे। उनकी प्रतिध्वनि वहाँ गूँज रही थी।   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  4.13.8 
कारण्डै: सारसैर्हंसैर्वञ्जुलैर्जलकुक्कुटै:।
चक्रवाकैस्तथा चान्यै: शकुनै: प्रतिनादितान्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
उन सरोवरों में सारस, हंस, बगुले, जलपक्षी, चक्रवाक आदि पक्षी कलरव कर रहे थे। उनकी प्रतिध्वनि वहाँ गूँज रही थी।
 
The cranes, swans, cranes, water birds, chakravakas and other birds were chirping in those lakes. Their echoes were resounding there. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)