Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 4.13.7: रास्ते में उन्होंने पानी से भरी झीलें भी देखीं, जो लाजवर्द के रंग की थीं, स्वच्छ जल की थीं और विरल रूप से खिली हुई कलियों वाले कमलों से सजी हुई थीं। | ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना । ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैदूर्यविमलैस्तोयै: पद्मैश्चाकोशकुड्मलै:।
शोभितान् सजलान् मार्गे तटाकांश्चावलोकयन्॥ ७॥
अनुवाद
रास्ते में उन्होंने पानी से भरी झीलें भी देखीं, जो लाजवर्द के रंग की थीं, स्वच्छ जल की थीं और विरल रूप से खिली हुई कलियों वाले कमलों से सजी हुई थीं।
On the way he also saw lakes full of water, which were the colour of lapis lazuli, clear water and were decorated with lotuses with sparsely bloomed buds.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥