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ramayan 4.13.5-6: वे सभी फूलों के भार से झुके हुए वृक्षों, स्वच्छ जल वाली समुद्र में बहती नदियों, गुफाओं, पर्वतों, शैल-गुफाओं, गुफाओं, मुख्य चोटियों और सुन्दर दिखने वाली गहरी गुफाओं को देखते हुए आगे बढ़ने लगे।   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 5-6
 
 
श्लोक  4.13.5-6 
ते वीक्षमाणा वृक्षांश्च पुष्पभारावलम्बिन:।
प्रसन्नाम्बुवहाश्चैव सरित: सागरंगमा:॥ ५॥
कन्दराणि च शैलांश्च निर्दराणि गुहास्तथा।
शिखराणि च मुख्यानि दरीश्च प्रियदर्शना:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वे सभी फूलों के भार से झुके हुए वृक्षों, स्वच्छ जल वाली समुद्र में बहती नदियों, गुफाओं, पर्वतों, शैल-गुफाओं, गुफाओं, मुख्य चोटियों और सुन्दर दिखने वाली गहरी गुफाओं को देखते हुए आगे बढ़ने लगे।
 
All of them began to move forward, looking at the trees bent under the weight of flowers, the sea-going rivers with clear water, the caves, mountains, rock cavities, caves, main peaks and the beautiful looking deep caves.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)