श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  4.13.30 
ततस्तु रामानुजरामवानरा:
प्रगृह्य शस्त्राण्युदितोग्रतेजस:।
पुरीं सुरेशात्मजवीर्यपालितां
वधाय शत्रो: पुनरागतास्त्विह॥ ३०॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् श्री राम के छोटे भाई लक्ष्मण, श्री राम और भयंकर क्रोध से भरे हुए वानर, शत्रुओं का संहार करने के लिए हाथों में शस्त्र लेकर पुनः इन्द्रकुमार वालि के पराक्रम से पोषित किष्किन्धापुरी में पहुँचे॥30॥
 
Thereafter, Shri Ram's younger brother Lakshman, Shri Ram and the monkeys, whose fierce anger had risen, again reached Kishkindhapuri with weapons in their hands to kill the enemies, nurtured by the bravery of Indra Kumar Vali. 30॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये किष्किन्धाकाण्डे त्रयोदश: सर्ग:॥ १३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामयाण आदिकाव्यके किष्किन्धाकाण्डमें तेरहवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ १३॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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