श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  4.13.3 
अग्रतस्तु ययौ तस्य राघवस्य महात्मन:।
सुग्रीव: संहतग्रीवो लक्ष्मणश्च महाबल:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
महान रघुनाथजी के आगे-आगे सुगरीव और पराक्रमी लक्ष्मण चल रहे थे।
 
Ahead of the great Raghunathji walked the well-built Sugreeva and the mighty Lakshmana.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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