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ramayan 4.13.28: धर्मात्मा श्री राम, उनके छोटे भाई लक्ष्मण, सुग्रीव और अन्य सभी वानर ऋषियों को प्रणाम करके प्रसन्नतापूर्वक आगे बढ़े।   |   ramayan सर्ग 4.13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना   ।   ramayan काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  4.13.28 
अभिवाद्य च धर्मात्मा रामो भ्राता च लक्ष्मण:।
सुग्रीवो वानराश्चैव जम्मु: संहृष्टमानसा:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
धर्मात्मा श्री राम, उनके छोटे भाई लक्ष्मण, सुग्रीव और अन्य सभी वानर ऋषियों को प्रणाम करके प्रसन्नतापूर्वक आगे बढ़े।
 
The virtuous Sri Rama, his younger brother Lakshmana, Sugreeva and all the other monkeys bowed to the sages and proceeded forward happily. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)