श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 4: किष्किंधा काण्ड  »  सर्ग 13: श्रीराम आदि का मार्ग में वृक्षों, विविधजन्तुओं, जलाशयों तथा सप्तजन आश्रम का दूर से दर्शन करते हुए पुनः किष्किन्धापुरी में पहुँचना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  4.13.26 
प्रणमन्ति हि ये तेषामृषीणां भावितात्मनाम्।
न तेषामशुभं किंचिच्छरीरे राम विद्यते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
हे राम! जो लोग इन शुद्ध हृदय वाले ऋषियों को नमस्कार करते हैं, उनके शरीर में पाप का लेशमात्र भी नहीं रहता।॥26॥
 
Shri Ram! Those who bow before these pure-hearted sages, not even the slightest trace of evil remains in their bodies.'॥ 26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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